Aravalli Parvatmala: संरक्षण की लड़ाई या खनन का खतरा? दिसंबर 2025
25 दिसंबर 2025 | नई दिल्ली | स्पेशल ब्लॉग
अरावली – दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला, उत्तर भारत की “ग्रीन वॉल” – इन दिनों फिर विवादों में है। सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा, #SaveAravalli कैंपेन, प्रदर्शन और केंद्र सरकार का नया बैन – सब कुछ चल रहा है। क्या अरावली सच में सुरक्षित है या खतरे में? चलिए, सरल भाषा में पूरी कहानी समझते हैं।

अरावली क्यों इतनी खास है?
उम्र: 2.5 अरब साल पुरानी – पृथ्वी की सबसे प्राचीन श्रृंखलाओं में से एक।
फैलाव: गुजरात से दिल्ली तक 692 किमी, मुख्य रूप से राजस्थान में।
काम: थार रेगिस्तान को रोकती है, भूजल रिचार्ज करती है, जैव विविधता का घर है, दिल्ली-NCR की हवा साफ रखती है।
खतरा: अगर बर्बाद हुई तो रेगिस्तान फैलेगा, पानी सूखेगा, प्रदूषण बढ़ेगा।
मुख्य विवाद: सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा (20 नवंबर 2025)
नई डेफिनिशन: 100 मीटर या उससे ज्यादा ऊंची पहाड़ियां ही “अरावली हिल्स”। 500 मीटर के दायरे में दो पहाड़ियां हों तो पूरा इलाका “रेंज”।
क्यों?: पहले अलग-अलग राज्यों में अलग नियम, अवैध खनन आसान था। केंद्र की कमिटी की सिफारिश पर कोर्ट ने मंजूर की।
विवाद: राजस्थान में 90% पहाड़ियां 100 मीटर से कम ऊंची – ये अब संरक्षित से बाहर? पर्यावरणविद कहते हैं – खनन और निर्माण बढ़ेगा
विरोध और #SaveAravalli कैंपेन
प्रदर्शन: गुरुग्राम, उदयपुर, जयपुर में हजारों लोग सड़कों पर। अशोक गहलोत ने “अरावली बचाओ यात्रा” शुरू की।
सोशल मीडिया: #SaveAravalli ट्रेंडिंग। लोग कह रहे – “90% अरावली खनन के लिए खुल जाएगी”।
राजनीति: कांग्रेस ने “माइनिंग लॉबी का खेल” कहा। BJP ने “झूठी अफवाह” बताया।
सरकार का पक्ष: संरक्षण मजबूत हुआ!
24 दिसंबर 2025 का बड़ा फैसला: पूरे अरावली में नई खनन लीज पर पूरी रोक। मौजूदा खदानों पर सख्त नियम।
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव: “90% से ज्यादा क्षेत्र संरक्षित। केवल 0.19% में ही संभव खनन। अवैध खनन पर ड्रोन निगरानी।”
अन्य कदम: अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट – लाखों पेड़ लगाए जा रहे। ICFRE को अतिरिक्त नो-माइनिंग जोन पहचानने का काम। आगे की अपडेट के लिए जुड़े रहें दुखहर्ता न्यूज साथ धन्यवाद!

