राजनीति

​ममता बनर्जी बनाम अमित शाह: बंगाल में ‘सियासी युद्ध’ तेज, ED की छापेमारी पर छिड़ा वाकयुद्ध

कोलकाता/नई दिल्ली | 10 जनवरी 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य में राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच चल रही जुबानी जंग ने अब एक गंभीर कानूनी और प्रशासनिक विवाद का रूप ले लिया है।

ED रेड के बाद ममता बनर्जी ने दी केंद्र सरकार को धमकी (Photo-PTI)

विवाद की मुख्य जड़: I-PAC और IT सेल पर ED की छापेमारी

हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता स्थित चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के कार्यालय और टीएमसी के आईटी सेल प्रमुख के आवास पर छापेमारी की। इस कार्रवाई ने ममता बनर्जी को बेहद आक्रोशित कर दिया है।

ममता बनर्जी का आरोप: मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर अमित शाह पर निशाना साधते हुए उन्हें “नार्सिसिस्ट और शरारती” (Nasty and Naughty) करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह ED का इस्तेमाल उनकी पार्टी की ‘चुनावी रणनीति’ (Election Strategy) और ‘उम्मीदवारों की सूची’ चुराने के लिए कर रहे हैं।

‘डेटा चोरी’ का दावा: ममता बनर्जी ने दावा किया कि छापेमारी का मकसद भ्रष्टाचार की जांच नहीं, बल्कि टीएमसी के डिजिटल डेटा और वोटर लिस्ट के संशोधनों (SIR) की जानकारी हासिल करना है।

ममता बनर्जी का पलटवार: ED अधिकारियों पर FIR

बंगाल के इतिहास में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ED अधिकारियों पर FIR दर्ज कराई है।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ED के अधिकारी “चोरों की तरह” आए और उनके पार्टी के महत्वपूर्ण दस्तावेज और हार्ड डिस्क ले गए।

उन्होंने एक विरोध रैली के दौरान चेतावनी दी, “अगर आप मुझे मारने आएंगे, तो मुझे बचाव का पूरा हक है। मेरे पास कई पेन ड्राइव हैं, अगर सीमा लांघी तो मैं सबको बेनकाब कर दूंगी।”

Mamta vs amit shah

अमित शाह और भाजपा का रुख

दूसरी ओर, अमित शाह ने बंगाल के अपने दौरों में ममता सरकार पर ‘घुसपैठ और भ्रष्टाचार’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

घुसपैठ का मुद्दा: शाह ने कहा कि ममता सरकार सीमा सुरक्षा में सहयोग नहीं कर रही है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है। उन्होंने वादा किया कि 2026 में भाजपा की सरकार बनने पर घुसपैठ पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।

भ्रष्टाचार के आरोप: भाजपा ने ममता बनर्जी द्वारा ED की कार्रवाई में बाधा डालने को ‘असंवैधानिक’ बताया है। सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजकर उनके द्वारा लगाए गए ‘कोयला घोटाले’ के आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

2026 के लिए ‘ध्रुवीकरण’ की बिसात

यह विवाद केवल जांच तक सीमित नहीं है। जहाँ भाजपा इसे ‘भ्रष्टाचार बनाम सुशासन’ का मुद्दा बना रही है, वहीं ममता बनर्जी इसे ‘बंगाल की अस्मिता और बाहरी हस्तक्षेप’ के रूप में पेश कर रही हैं। चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि यह 2026 के चुनाव को भारत के सबसे ध्रुवीकृत चुनावों में से एक बना सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *