Modi and Trump: तीसरी फोन कॉल | टैरिफ बढ़ोतरी के बाद भारत-अमेरिका रिश्तों पर क्या असर? पूरी डिटेल्स!
12 दिसंबर 2025 | नई दिल्ली | स्पेशल कवरेज
नमस्कार दोस्तों! अगर आप न्यूज स्क्रॉल कर रहे हैं, तो एक ही हेडलाइन बार-बार दिख रही होगी – “मोदी-ट्रंप की तीसरी फोन कॉल”। कल शाम (11 दिसंबर) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की। ये कॉल तब हुई जब अमेरिका ने भारत के कुछ प्रमुख निर्यातों पर टैरिफ दोगुना (50% तक) कर दिया है। ये टैरिफ भारत के रूस से तेल खरीदने की सजा के तौर पर लगाए गए हैं।
तो आखिर इस कॉल में क्या हुआ? क्यों है ये इतना महत्वपूर्ण? और भारत-अमेरिका के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा? चलिए, सरल हिंदी में पूरी डिटेल समझते हैं। हमने रॉयटर्स, बीबीसी ब्लूमबर्ग, स्ट्रेट्स टाइम्स और पीएम मोदी के ऑफिशियल ट्वीट से ये जानकारी ली है।
1. कॉल का बैकग्राउंड: टैरिफ बढ़ोतरी क्या है?
- टैरिफ हाइक कब हुआ? जुलाई 2025 में अमेरिका ने भारत पर “सेकेंडरी टैरिफ” लगाने का ऐलान किया। ये 25% अतिरिक्त टैक्स था, जो पहले से मौजूद 25% बॉर्डर टैरिफ के ऊपर लगा। कुल मिलाकर 50% तक हो गया। ये 27 अगस्त 2025 से लागू हुआ।
- क्यों लगाया? अमेरिका का कहना है कि भारत रूस के सस्ते तेल (क्रूड ऑयल) खरीद रहा है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे सैंक्शन्स का उल्लंघन है। ट्रंप ने इसे “अमेरिका फर्स्ट” पॉलिसी का हिस्सा बताया। भारत ने इसे “अनफेयर” कहा, क्योंकि रूस से तेल खरीदना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है।
- किन चीजों पर असर? टेक्सटाइल (कपड़े), केमिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स जैसे झींगा (श्रिंप) और अन्य एक्सपोर्ट्स। इससे भारत को अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। एक्सपोर्टर्स परेशान, लाखों जॉब्स खतरे में।
2. तीसरी कॉल: कब, कितनी लंबी और क्या हुआ?
- कब हुई? 11 दिसंबर 2025 को शाम को। ये तीसरी बार है जब टैरिफ हाइक के बाद दोनों लीडर्स ने बात की। पहली कॉल अगस्त में, दूसरी अक्टूबर में हुई थी।
- कितनी लंबी? करीब 45 मिनट। पीएम मोदी ने इसे “वार्म एंड एंगेजिंग” (गर्मजोशी भरी और दिलचस्प) बताया।
- क्या चर्चा हुई?
- बाइलेटरल रिलेशन्स रिव्यू: दोनों ने भारत-अमेरिका रिश्तों की प्रोग्रेस पर नजर डाली। ट्रेड, डिफेंस, सिक्योरिटी, एनर्जी और क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज (जैसे AI) पर बात।
- ग्लोबल इश्यूज: रीजनल और इंटरनेशनल डेवलपमेंट्स पर डिस्कस। खासकर इंडो-पैसिफिक की सिक्योरिटी, ग्लोबल पीस और स्टेबिलिटी।
- ट्रेड डील की उम्मीद: एक मिनी-ट्रेड डील पर बात, जो 2026 की शुरुआत तक हो सकती है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपने टैरिफ कम करे, नॉन-टैरिफ बैरियर्स हटाए और यूएस प्रोडक्ट्स को ज्यादा एक्सेस दे। लेकिन 2025 खत्म होने से पहले डील मुश्किल लग रही।
पीएम मोदी ने X (ट्विटर) पर लिखा: “प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ बहुत गर्मजोशी भरी बातचीत हुई। हमने द्विपक्षीय रिश्तों की प्रोग्रेस रिव्यू की और रीजनल-इंटरनेशनल मुद्दों पर चर्चा की। भारत और अमेरिका ग्लोबल पीस, स्टेबिलिटी और प्रॉस्पेरिटी के लिए साथ काम करते रहेंगे।”
3. कॉल का महत्व: भारत-अमेरिका रिश्तों पर क्या असर?
- ट्रेड टेंशन के बीच सकारात्मक सिग्नल: ये कॉल तब हुई जब रिश्ते थोड़े तनावपूर्ण हैं। लेकिन दोनों लीडर्स ने स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप पर जोर दिया। भारत अमेरिका के लिए इंडो-पैसिफिक में चीन को बैलेंस करने का बड़ा पार्टनर है। डिफेंस, टेक और इंटेलिजेंस कोऑपरेशन मजबूत रहेगा।
- टैरिफ रिलीफ की उम्मीद: भारत राहत मांग रहा है। ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” पॉलिसी से ट्रेड डील रुक रही, लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भारत की स्ट्रेटेजिक वैल्यू से डील जल्द हो सकती। व्हाइट हाउस ने पिछले कॉल्स को “कंस्ट्रक्टिव” बताया।
- चुनौतियां: भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा (स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी के लिए), लेकिन अमेरिका दबाव डाल रहा। स्टील पर टैरिफ से भारत में 5 लाख जॉब्स खतरे में।
| पक्ष | मुख्य मुद्दा | संभावित असर |
|---|---|---|
| ट्रेड | 50% टैरिफ (टेक्सटाइल, केमिकल्स, श्रिंप) | निर्यात में 20-30% गिरावट, मिनी डील की उम्मीद 2026 तक |
| एनर्जी | रूस तेल खरीद पर दबाव | भारत की ऊर्जा सुरक्षा बरकरार, लेकिन सैंक्शन्स रिस्क |
| डिफेंस/टेक | AI, सिक्योरिटी कोऑपरेशन | इंडो-पैसिफिक में मजबूत पार्टनरशिप, चीन को काउंटर |
| ग्लोबल | पीस और स्टेबिलिटी | यूक्रेन, मिडिल ईस्ट पर सहयोग बढ़ेगा |
- ट्रेड डील? 2025 खत्म होने से पहले मुश्किल, लेकिन 2026 में मिनी डील पॉसिबल। अमेरिका चाहता है भारत टैरिफ कम करे।
- अगली मीटिंग? अभी कोई ऐलान नहीं, लेकिन G20 या UN में मिलन हो सकता।
- भारत की स्ट्रेटजी: पीएम मोदी बैलेंस कर रहे – रूस से तेल, अमेरिका से टेक/डिफेंस।
ये कॉल ट्रेड तनाव के बीच एक सकारात्मक कदम है। मोदी-ट्रंप की केमिस्ट्री पुरानी है (2020 की तरह), लेकिन रियल चैलेंज टैरिफ हटाना है। भारत-अमेरिका रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन ट्रेड बैलेंस जरूरी। आप क्या सोचते हैं – टैरिफ हटने चाहिए या नहीं? कमेंट में बताएं! आगे की अपडेट पाने के लिए फॉलो करें दुखहर्ता न्यूज धन्यवाद।

