सच्ची कहानियाँ

Real Story:चुगलखोर बुआ ब्याजखोर फूफा | पेज 1 | भूमिका

भूमिका

इस कहानी का उद्देश्य किसी के दिल को ठेस पहुँचाना या किसी रिश्ते को बुरा बताना नहीं है, इस कहानी द्वारा समाज को यह संदेश देने का प्रयास है कि रिश्ते स्वत: खराब नहीं होते बल्कि उनमें कुछ न कुछ छोटी छोटी कमियाँ और नासमझी होती हैं जो कुछ समय बाद बड़ा रूप लेकर सामने आती हैं, और आज के दौर में सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा इसी तरह से समाज में पनपती हुई देखने को मिल रही हैं,इसमें से चुगलखोरी एक है जो समाज,घर,परिवार,रिश्ते,समुदाय या संगठन को हमेशा के लिए तोड़ देती है, चुगलखोरी वह अभिशाप है जो मंथरा,सकुनी जैसे चरित्रहीन पात्रों को जन्म देती है,परिणामतः राम वनवास,महाभारत जैसे युद्ध देखने को मिलते हैं,यह एक प्रकार की बुरी आदत व्यक्तित्व विकास के अभाव से या बुरी संगत प्रभाव से उत्पन्न होती है इसलिए चुगलखोरी सबसे बड़ा पाप है, व्यक्तित्व विकास प्रभाव घर के संस्कार पर निर्भर करता है,आप इस कहानी में देखेंगे कि दूसरे का दिल दुखाकर अर्जित किया धन या अधिक सूदखोरी से उगाया धन या किसी द्रव्य पदार्थ में मिलावटी फायदे से कमाया धन आपके मन,बुद्धि,चित्त,मति को दूषित करके आपकी नैतिकता को मारता है,और आपके द्वारा कमाए गए पुण्य को नष्ट करता है,परिणामतः उसके बाद आपको जीवन में तीन तरह के दुख देखने को मिलते हैं:- दैहिक दुख(शरीर का दुख),दैविक दुख(भगवान का दिया दुख),भौतिक दुख(प्रकृति का दिया दुख) कुल मिलाकर धन होने पर भी उसका सही उपभोग सुख न मिलना, कवि का मानना है सूदखोरी,चोरी,बेईमानी से कमाए धन से ज्यादा अच्छा वेश्या का धन होता है जो अपने जिस्म को बेचकर कमाती है, इसका मतलब रिश्ते खराब होना या संतान का बिगड़ जाना ऐसे तमाम दुख जीवन भर बने रहते हैं, आप समाज में गहराई से नजर डालें आपको ब्याजखोर किसी न किसी दुख से पीड़ित मिलेगा। इसलिए कम कमाए लेकिन पूरी मेहनत और ईमानदार से ताकि आपकी पीड़ियाँ आपका नाम लें,सब कुछ पैसे से खरीदा जा सकता है लेकिन आपका अच्छा चरित्र, जमीर,ईमानदारी को कोई नहीं खरीद सकता। सर्वश्रेष्ठ लोगों की यही सबसे बड़ी पूंजी है। आपको इस कहानी को पढ़कर बहुत कुछ सीखने को मिलेगा जो आप खुद से जुड़े रिश्तों में जोड़ कर रिश्तों रिश्तों मे सुधार कर सकते हैं।

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